Khat Ko Likhta Hoom…

 

Subki Zindagi Mein Kuch Aise Panne Hai…
Jin Par Siyahi To Hai Par Alfaaz Nazar Nehi Aate…

 

The song Khat Ko Likhta Hoom starts off after the narration (Ibteda)

Ibteda:

काश, काश, काश.

क्या छुपा है आख़िर इस अल्फ़ाज़ मैं.

ज़िंदगी के साए लंबे हुए जाते हैं

पर ये कम्बखत ज़िंदगी से जाने का नाम ही नहीं लेता.

हर एक मोड़ पे कोई ना कोई अधूरापन घेर लेता है तन्हा पा के,

और इस एहसास के साथ छ्चोड़ जाता है.

ज़िंदगी मैं सब को एक ही मलाल है.

सब की ज़िंदगी मैं कुच्छ ऐसे पन्ने हैं

जिन पर सियाही तो है पर अल्फ़ाज़ नज़र नहीं आते.

लगता है जैसे सियाही को बेतरतीब पन्ने पे फैला दिया गया हो

जैसे कोई बच्चा अपने खिलोनों को बिखेर देता है.

ऐसे ही पन्ने जिन की सियाही से कुच्छ अल्फ़ाज़ उभर आते.

काश.

– Birla

The Official Video:

The Soundcloud Channel:


Video with Lyrics:

Khat Ko Likhta Hoom:

ख़त को लिखता हूँ और लिख के मिटा देता हूँ


दिल के एहसास-ए-मोहब्बत को ऐसे ही हवा देता हूँ


हर रात बनाता हूँ शिद्दत से ये कश्ती को


और सुबह के होते ही दरिया मैं बहा देता हूँ


होगा तो कभी उन को भी एहसास मोहब्बत का


जब तक नहीं होता हैफरिश्तों को बता देता हूँ


करता हूँ शब-ओ-रोज़ तेरे इश्क़ का ही चर्चा


पूछे है अगर कोई तो बात कुछ और बना देता हूँ


आयेंगी कभी तो खुशियां मेरे भी घरोंदोंमैं


अभी तो गैर कि खुशियों मैं ही ईद मना लेता हूँ


Making of the song, a home recording during the composition phase…sometime during 2013.

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  • Vipin Ac

    @Shammas…Good one.. Did Mehdi Hassan influenced you anytime?? All the best!..

    • Thanks a lot Vipin…Very glad you liked it… Haven’t ventured much with Mehdi Hassan saab, but the few I have listened to like Muhabbat Karne Wale Kum Na Honge are my top favorites… 🙂